इंसान कैद में है

Rena weds Gaurav Ji – Family Wedding
February 2, 2020
चालाकी का अर्थ है : परिणाम / हिसाब
April 12, 2020
Show all

इंसान कैद में है

धर्मों की, जातियों की, मृत और अंधी परंपराओं की। हाँ इंसान आजाद है – भ्रष्टाचार फैलाने में, प्रदूषण फैलाने में, गन्दगी फैलाने में, पृथ्वी का हर तरह से शोषण करने में, जनसंख्या वृद्धि में, तथा स्त्रीजाति का शोषण करने में – उनका वस्तु भांति उपभोग करने में, उनका निरादर करने में, उनके साथ रेप जैसे कुकर्मों में, हर बुरे कर्म की आजादी है उसे पर वास्तविक आजादी, वास्तविक देशप्रेम उसकी समझ से परे है।

छुआछूत के मूल मे अस्वच्छता ही रही होगी। अभी भी हमे अस्वच्छ व्यक्तियों (mentally ill people) से दूर ही रहने का प्रयत्न करना चाहिए !!

स्वतंत्रता का सीधा संबंध ह्रदय से है। हमारा ह्रदय आजादी का मुख्य वाहक है। परंतु यहाँ ह्रदय पर ही बेड़ियाँ पड़ी है, रिवाजों की, धर्मों की, ढोंगों की, खासकर इज्जत की। इज्जत नाम के शब्द ने ह्रदय को जितना सताया है, जितना अत्याचार किया है, जो शब्दहीन है।

आज भी हमारा ह्रदय असंख्य कैदों से घिरा हुआ है। ये कैदें (धर्म एवं जातियों की), ये पराधीनताए (झूठी मान-मर्यादाओं की, झूठे सम्मान की), ये बेड़ियाँ (रिवाजों की, संस्कृतियों की), इन सब अवरोधों से ह्रदय मृत हो जाता है। और ह्रदयहीन मनुष्य पुतला समान है, जिसमें संवेदनाये नहीं है।

संवेदनहीन मनुष्य, मनुष्य को ही प्रेम नहीं कर सकता तो देश को क्या करेगा ? सब एक दूसरे के प्रति ईर्ष्या से भरे हुये है, कहीं धर्मों की तो कहीं जातियों की, कही छोटे बड़े रिश्तो की , कहीं अमीरी की तो कहीं गरीबी की, ऐसे मनुष्य जिन्हे अपनी ही मनुष्यजाति के प्रति इतनी ईर्ष्या है, जो अपने जैसों को ही प्रेम नहीं कर सकते वो देश को क्या खाक प्रेम करेंगे ?

 

प्रेम का, एक विशाल रूप है ह्रदय के साक्षात्कार का। देशप्रेम देश में चल रहे अन्याय, अत्याचार, अंधविश्वासों, के प्रति हमें सोचने पर मजबूर कर देता है। हाँ अगर वास्तव में प्रेम होगा तो हम उठ खड़े होंगे उस हर बुराई के विरोध में जो देश को हानि पहुँचा रही है, देश के विकास में अवरोध बन रही है, देश को दुनिया में शर्मसार कर रही है। जहाँ लड़कियों को रात्रि में कहीं जाने से डरना पड़ता है, जहाँ हर घंटे में 1 बलात्कार हो रहा है। जहाँ लड़कियाँ वस्तुए समझी जाती है, और विवाहों में उनका तोल-मोल हो रहा है। लगभग हर तरह की अमानवीय घटना के लिए जब हमारे ह्रदय में विचार जन्मेगा और हम उसे किसी न किसी तरह नष्ट करने के लिए आगे आयेंगे, स्वयं को बदल डालेंगे और दूसरों को भी बदलाव के लिए प्रेरित करेंगे तब जाकर हम सच्चा देश प्रेम दर्शाएँगे और सिर्फ झंडे फहराने से कुछ भी न बदलेगा न ही ये देश प्रेम कहलाएगा।

आज जरुरत है रोजगारोन्मुखी शिक्षा की, साफ पानी की, स्वच्छ हवा की, सुगम आवागमन की, साफ सफाई की लेकिन हमारा ध्यान भटकाया जा रहा है धर्म और जातियां में जो आज सारे फसादों की जड़ है और नेताओं का साम्राज्य इन जाति और धर्मों के स्तंभों पर टिका है, और यही नेता जोंक की भाँति जनता का खून चूसते आये है।

मतलब जातिगत विसंगति दूर करना ही एक मात्र रास्ता है जो देश को वास्तविक #लोकतांत्रिक_राष्ट्र बना सकता है। जहां सभी धर्म और जातियां बड़े ही सद्भाव और प्रेम से जीवन व्यतीत कर सकेंगी।अभी तो महज कहने का #लोकतंत्र है।

#NoCastiesm #LoveCountry #India #Patriotic

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *